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गोधूलि बेला

आज की गोधूलि बेला — सूर्यास्त की गोधूलि

सूर्यास्त से बारह मिनट पहले से बारह मिनट बाद तक: एक घटी, सूर्य के डूबने के क्षण पर केंद्रित। शास्त्रों में यह स्वयंसिद्ध मुहूर्तकोई काम शुरू करने के लिए चुना गया समय, जैसे विवाह, दुकान या यात्रा। इसमें अच्छा समय ढूँढ़ना जितना ज़रूरी है, बुरी घड़ियाँ छोड़ना उतना ही। है, इसीलिए जब और कुछ नहीं बैठता तो विवाह और गृह प्रवेश इसी में रखे जाते हैं।

· गुरुवार · पटना

पटना के अपने सूर्यास्त से गिना हुआ। यह खिड़की देशांतर और मौसम के साथ ठीक वैसे ही खिसकती है जैसे राहु कालहर दिन की लगभग डेढ़ घंटे की वह घड़ी जिसमें कोई नया काम शुरू नहीं किया जाता: न यात्रा, न ख़रीदारी, न हस्ताक्षर। चलता काम जारी रखना ठीक है।। इसीलिए एक राष्ट्रीय गोधूलि समय लगभग हर जगह ग़लत होता।

पटना में गुरुवार 22 अक्टूबर को गोधूलि बेला 05:04 अपराह्न से 05:28 अपराह्न तक है।

गोधूलि बेला

05:04 अपराह्न – 05:28 अपराह्न

सूर्यास्त के ठीक आगे-पीछे बारह-बारह मिनट। विवाह और गृह प्रवेश के लिए स्वयंसिद्ध मुहूर्त।

इस हफ़्ते, दिन-ब-दिन

इस हफ़्ते, दिन-ब-दिन

हर पंक्ति उस दिन के अपने सूर्यास्त से गिनी गई है, आज का समय हफ़्ते भर पर खींचकर नहीं।

दिनगोधूलि बेलासूर्यास्त के आगे-पीछे बारह-बारह मिनट, वह समय जब गायें घर लौटती थीं। विवाह और गृह प्रवेश के लिए यह स्वयंसिद्ध मुहूर्त है।
गुरुवारगुरुवार, 22 अक्टूबर 202605:04 अपराह्न – 05:28 अपराह्न
शुक्रवारशुक्रवार, 23 अक्टूबर 202605:03 अपराह्न – 05:27 अपराह्न
शनिवारशनिवार, 24 अक्टूबर 202605:02 अपराह्न – 05:26 अपराह्न
रविवाररविवार, 25 अक्टूबर 202605:01 अपराह्न – 05:25 अपराह्न
सोमवारसोमवार, 26 अक्टूबर 202605:00 अपराह्न – 05:24 अपराह्न
मंगलवारमंगलवार, 27 अक्टूबर 202604:59 अपराह्न – 05:23 अपराह्न
बुधवारबुधवार, 28 अक्टूबर 202604:59 अपराह्न – 05:23 अपराह्न

गोधूलि बेला

गोधूलि बेला असल में है क्या

गो यानी गाय और धूलि यानी धूल: वह घड़ी जब गायें चरकर लौटती हैं और रास्ते में धूल उड़ती है। परंपरा के गिने-चुने समय-नामों में से एक, जो किसी गणना का नहीं, एक दृश्य का नाम है।

मुहूर्त गणपति इसे सूर्यास्त के दोनों ओर आधी-आधी घटी पर तय करता है, यानी बारह मिनट पहले और बारह मिनट बाद, कुल चौबीस। यह सूर्यास्त के आर-पार फैली है, और यही बात सबसे ज़्यादा ग़लत बताई जाती है: खिड़की को सूर्यास्त से आगे गिनने पर वह आधा हिस्सा छूट जाता है जिसके नाम पर यह बेला है। धूल तब उड़ती है जब सूरज अभी डूबा नहीं होता।

इसे स्वयंसिद्ध कहा गया है। दावा यह है कि इस खिड़की को तिथि, लग्नजन्म के समय पूर्वी क्षितिज पर उदय होती राशि, और कुंडली का पहला भाव। यह हर दो घंटे में बदलती है, इसलिए जन्म समय का सही होना ज़रूरी है। या नक्षत्रचंद्रमा जिस तारे से गुज़र रहा है। कुल सत्ताईस हैं, और आपका नक्षत्र नामकरण का अक्षर तय करता है और मिलान का बड़ा हिस्सा भी। की सहमति नहीं चाहिए। इसीलिए जिस परिवार को पूरे महीने में कोई साफ़ मुहूर्त न मिले, उसका विवाह भी संध्या में हो सकता है।

यह क्या नहीं है

यह क्या नहीं है

  • यह बाक़ी कुंडलीआपकी जन्म कुंडली: जन्म के ठीक उसी क्षण आपके जन्मस्थान के ऊपर का आकाश, बारह भावों में खींचा हुआ। को अनदेखा करने की छूट नहीं है। "अपने आप में पूर्ण" समय के बारे में कहा गया है, यह दावा नहीं कि सूर्यास्त में हुआ हर विवाह अच्छा ही चलेगा।
  • यह सूर्यास्त के बाद के चौबीस मिनट भी नहीं हैं। ऑनलाइन सबसे ज़्यादा यही छपा मिलता है और वह आधा सही है। खिड़की सूर्यास्त के बाद नहीं, उसके आर-पार होती है।

सवाल

सवाल

आज गोधूलि बेला कितने बजे है?

आपके शहर के सूर्यास्त के दोनों ओर बारह-बारह मिनट। सही समय ऊपर दिया है, और बाक़ी हर शहर नीचे एक टैप दूर है।

गोधूलि मुहूर्त कितनी देर का होता है?

24 मिनट, यानी एक घटी। सूर्यास्त से बारह मिनट पहले और बारह मिनट बाद।

क्या गोधूलि बेला विवाह के लिए शुभ है?

परंपरा में यह ठीक इसी काम के लिए इस्तेमाल होने वाली खिड़कियों में से एक है, और इसकी प्रतिष्ठा इस मान्यता से आती है कि इसे बाक़ी गणनाओं के सहारे की ज़रूरत नहीं। यह परंपरा के बारे में कथन है, किसी विवाह के बारे में भविष्यवाणी नहीं।

अपने शहर की गोधूलि बेला

अपने शहर की गोधूलि बेला

भारत भर में सूर्यास्त एक घंटे से भी ज़्यादा फ़र्क़ से होता है। अपना शहर चुनिए।

दिन का दूसरा सिरा

दिन का दूसरा सिरा

ब्रह्म मुहूर्तभोर से ठीक पहले के अड़तालीस मिनट। परंपरा इसे पढ़ाई, पूजा और उन कामों के लिए रखती है जिनमें शांत मन चाहिए। दिन खोलता है जैसे यह खिड़की उसे बंद करती है, भोर से 48 मिनट पहले।

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