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तिथि

आज की तिथि — दोनों सिरों के साथ

तिथि कैलेंडर की तारीख़ नहीं है। यह अपने ही पल पर शुरू होती है और अपने ही पल पर ख़त्म, अक्सर दोपहर के बीचोंबीच। इसीलिए अकेला नाम आपके किसी काम का नहीं।

· शनिवार

दिल्ली में शनिवार 12 सितंबर को शुक्ल प्रतिपदा तिथि है, जो 11 सित॰ को 08:57 पूर्वाह्न से 07:46 पूर्वाह्न तक रहती है।

अभी

आज की तिथि

दिल्ली में सूर्योदय पर

शुक्ल प्रतिपदापक्ष की पहली तिथि, अमावस्या या पूर्णिमा के अगले दिन। चंद्र वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही शुरू होता है।

शुक्ल पक्ष · बढ़ता चाँद

शुरू
11 सित॰
ख़त्म

और फिर, आज ही

  • शुक्ल द्वितीयादूसरी तिथि। विवाह के लिए मान्य तिथियों में यह भी है, और दिवाली के ठीक बाद वाली द्वितीया को भाई दूज पड़ता है।

    शुक्ल पक्ष · बढ़ता चाँद

    से 13 सित॰

एक दिन को दो तिथियाँ छूना सामान्य है, कोई गड़बड़ी नहीं। व्रत या श्राद्ध तय करते समय देखिए कि जिस घड़ी का विधान है उस घड़ी कौन-सी तिथि चल रही है: ज़्यादातर उपवासों के लिए सूर्योदय, कुछ के लिए दोपहर या चंद्रोदय।

यह क्यों खिसकती है

तिथि दोपहर में क्यों बदल जाती है

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से बारह अंश आगे निकल जाता है। ऐसी तीस तिथियों का एक चंद्र मास बनता है। चंद्रमा एक रफ़्तार से नहीं चलता, पृथ्वी के पास होने पर तेज़ चलता है, इसलिए तिथि की लंबाई तय नहीं है: यह क़रीब उन्नीस घंटे की भी हो सकती है और छब्बीस घंटे की भी।

दिन ठीक चौबीस घंटे का होता है। अलग-अलग लंबाई के दो अंतराल कदम से कदम नहीं मिला सकते, इसलिए तिथि के ख़त्म होने का पल रोज़ थोड़ा खिसकता है और जहाँ पड़ता है वहीं पड़ता है: इस हफ़्ते 04:10, अगले हफ़्ते 15:40। खाने के समय तिथि बदल जाए तो कुछ ग़लत नहीं हुआ।

जवाब का दूसरा आधा हिस्सा यह है कि पंचांगदिन के पाँच अंग एक साथ: वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। पंचांग किसी तारीख़ के बारे में जो कुछ कहता है, वह यहीं से शुरू होता है। का दिन सूर्योदय से सूर्योदयतक चलता है, आधी रात से नहीं। आधी रात के बाद और भोर से पहले के घंटे अब भी कल के वारवार, यानी सप्ताह का दिन और पंचांग का पहला अंग। हर दिन एक ग्रह का होता है, इसीलिए मंगलवार और शुक्रवार का पाठ अलग होता है। के हैं। इसीलिए किसी तारीख़ “की” तिथि परंपरा से वही मानी जाती है जो सूर्योदय पर चल रही हो, और इसीलिए यह पेज बताता है कि सूर्योदय किस शहर का है।

इस हफ़्ते

अगले सात दिन की तिथि

दिल्ली में सूर्योदय पर चल रही तिथि, और वह कब आगे सौंप देती है। हर पंक्ति उस दिन के लिए अलग से गिनी गई है।

वारसूर्योदय पर तिथिख़त्म
शनिवारआजशुक्ल प्रतिपदापक्ष की पहली तिथि, अमावस्या या पूर्णिमा के अगले दिन। चंद्र वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही शुरू होता है।07:46 पूर्वाह्न
रविवाररविवार, 13 सितंबर 2026शुक्ल द्वितीयादूसरी तिथि। विवाह के लिए मान्य तिथियों में यह भी है, और दिवाली के ठीक बाद वाली द्वितीया को भाई दूज पड़ता है।07:08 पूर्वाह्न
सोमवारसोमवार, 14 सितंबर 2026शुक्ल तृतीयातीसरी तिथि। वैशाख की अक्षय तृतीया और सावन की हरियाली तीज इसी पर पड़ती हैं, और विवाह के लिए यह मान्य है।07:07 पूर्वाह्न
मंगलवारमंगलवार, 15 सितंबर 2026शुक्ल चतुर्थीहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।07:44 पूर्वाह्न
बुधवारबुधवार, 16 सितंबर 2026शुक्ल पंचमीपाँचवीं तिथि। वसंत पंचमी और नाग पंचमी दोनों इसी के नाम पर हैं, और पढ़ाई तथा नई सीख के लिए यह अच्छी मानी जाती है।08:59 पूर्वाह्न
गुरुवारगुरुवार, 17 सितंबर 2026शुक्ल षष्ठीछठी तिथि, कार्तिकेय और संतान से जुड़े कर्मों की। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी ही छठ है।10:48 पूर्वाह्न
शुक्रवारशुक्रवार, 18 सितंबर 2026शुक्ल सप्तमीसातवीं तिथि, सूर्य की तिथि। माघ की रथ सप्तमी सूर्य के उत्तर की ओर मुड़ने का दिन मानी जाती है, और यह तिथि सेहत तथा बल के कामों की है।01:01 अपराह्न

यह है क्या

तीस तिथियाँ, दो पक्षों में

एक चंद्र मास दो पक्षों में बँटा होता है, हर पक्ष में पंद्रह तिथियाँ। शुक्ल पक्ष उजला आधा है, अमावस्या से पूर्णिमा तक, जब चाँद बढ़ता है। कृष्ण पक्ष अँधेरा आधा, पूर्णिमा से वापस अमावस्या तक, जब वह घटता है। दोनों एक से पंद्रह तक गिने जाते हैं, इसीलिए तिथि हमेशा अपने पक्ष के साथ बोली जाती है: अकेली सप्तमी महीने में दो अलग दिन होते हैं।

चौदह नाम दोनों पक्षों में दोहराए जाते हैं: प्रतिपदापक्ष की पहली तिथि, अमावस्या या पूर्णिमा के अगले दिन। चंद्र वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही शुरू होता है।, द्वितीयादूसरी तिथि। विवाह के लिए मान्य तिथियों में यह भी है, और दिवाली के ठीक बाद वाली द्वितीया को भाई दूज पड़ता है।, तृतीयातीसरी तिथि। वैशाख की अक्षय तृतीया और सावन की हरियाली तीज इसी पर पड़ती हैं, और विवाह के लिए यह मान्य है। और आगे चतुर्दशीचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है। तक। सिर्फ़ पंद्रहवीं अलग है: उजले आधे के अंत में पूर्णिमा और अँधेरे के अंत में अमावस्या। हिंदू पंचांगदिन के पाँच अंग एक साथ: वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। पंचांग किसी तारीख़ के बारे में जो कुछ कहता है, वह यहीं से शुरू होता है। के लगभग सारे व्रत और त्योहार इन्हीं तीस में से किसी एक से बँधे हैं, तारीख़ से नहीं, इसीलिए दीवाली, होली और हर एकादशीहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है। हर साल अलग तारीख़ पर आती हैं और तिथि वही रहती है।

आज और भी

दिन का बाक़ी हिसाब

आपका शहर

अपने शहर की तिथि

एक सीधी बात: तिथि के ख़त्म होने का पल पूरे भारत में एक ही है, क्योंकि वह चंद्रमा की एक स्थिति है, कोई स्थानीय घटना नहीं, इसलिए ऊपर का समय शहर बदलने से नहीं बदलता। जो सचमुच बदलता है वह सूर्योदयहै, और उसी से तय होता है कि दिन “की” तिथि कौन-सी है। ये पेज वही बताते हैं, बाक़ी पंचांग के साथ।

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आज की तिथि सबके लिए एक ही है। जिस तिथि पर आपका जन्म हुआ, वह नहीं, और उसके लिए आपकी जन्म तारीख़, समय और स्थान चाहिए।

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यह पेज कैसे निकाला जाता है

  • तिथियों के सिरे हमारे अपने गणना इंजन से उन पलों के रूप में निकाले जाते हैं जब चंद्रमा की सूर्य से दूरी बारह अंश के हर गुणक को पार करती है।
  • यह गणना लाहिरीभारतीय पंचांग जिस अयनांश मान पर टिके हैं, और यहाँ की हर कुंडली इसी मान से बनती है। दो जगहों की कुंडली अलग निकले तो फ़र्क़ अक्सर यहीं से शुरू होता है। अयनांशआकाश के स्थिर तारों और सायन राशिचक्र के बीच का अंतर, इस समय लगभग चौबीस अंश। हम लाहिड़ी मान लेते हैं, और इसी से दो जगहों की गणना अलग दिखती है। के साथ निरयण है, यही भारतीय नागरिक मानक है, और यही वजह है कि दो पंचांगदिन के पाँच अंग एक साथ: वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। पंचांग किसी तारीख़ के बारे में जो कुछ कहता है, वह यहीं से शुरू होता है। कभी एक मिनट से अलग निकलते हैं।
  • सूर्योदय, जिससे तय होता है कि दिन की तिथि कौन-सी है, दिल्ली के अपने निर्देशांक के लिए निकाला जाता है।
  • सभी समय भारतीय मानक समय में हैं।
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