पर्व
बुद्ध पूर्णिमा की तिथियाँ
हर वर्ष की गणना चंद्रमा और सूर्य से। हर पंक्ति में वह तिथि है जिस पर पर्व पड़ता है, और चंद्र मास दोनों पद्धतियों में यानी अमांत तथा पूर्णिमांत, क्योंकि कृष्ण पक्ष में दोनों एक ही मास को अलग नाम देते हैं।
अन्य नाम: वैशाख पूर्णिमा, बुद्ध जयंती, वेसाक
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गुरुवार, 20 मई 2027
Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।, Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
भद्रा 04:12 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।
पर्व
नियम
तिथि किससे निकाली गई है, इस तरह लिखा हुआ कि आप जाँच सकें।
वैशाखदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है। पूर्णिमापूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।। मान्यता है कि बुद्ध का जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण तीनों इसी एक पूर्णिमा को हुए।
दिन तय होता है सूर्योदय के समय की तिथि.
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बुद्ध पूर्णिमा की तिथियाँ
| वर्ष | तारीख़ | तिथिचंद्र दिन। यह चाँद की एक कला से अगली कला तक चलती है, इसलिए सूर्योदय पर ही शुरू हो, ज़रूरी नहीं। व्रत और त्योहार इसी से तय होते हैं। | चंद्र मासचंद्र मास, जिसका नाम पूर्णिमा के नक्षत्र पर पड़ता है। यह लगभग साढ़े उनतीस दिन का होता है, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर से खिसकता रहता है। |
|---|---|---|---|
| 2025सोमवार | सोमवार, 12 मई 2025 | Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 09:15 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 2026शुक्रवार | शुक्रवार, 1 मई 2026 | Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 10:00 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 2027गुरुवार | गुरुवार, 20 मई 2027 | Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 04:12 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 2028सोमवार | सोमवार, 8 मई 2028 | Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 02:23 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 2029रविवार | रविवार, 27 मई 2029 | Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 01:39 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 2030शुक्रवार | शुक्रवार, 17 मई 2030 | Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 06:43 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
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दूसरे पर्व
हर एक अपने नियम और अपनी तिथियों के साथ।
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वर्ष भर के सभी पर्व और व्रत, एक ही सूची में।
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