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पर्व

कार्तिक पूर्णिमा की तिथियाँ

हर वर्ष की गणना चंद्रमा और सूर्य से। हर पंक्ति में वह तिथि है जिस पर पर्व पड़ता है, और चंद्र मास दोनों पद्धतियों में यानी अमांत तथा पूर्णिमांत, क्योंकि कृष्ण पक्ष में दोनों एक ही मास को अलग नाम देते हैं।

अन्य नाम: देव दिवाली, त्रिपुरारी पूर्णिमा, गुरु नानक जयंती

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मंगलवार, 24 नवंबर 2026

Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।, Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।

भद्रा 10:05 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।

पर्व

नियम

तिथि किससे निकाली गई है, इस तरह लिखा हुआ कि आप जाँच सकें।

कार्तिकआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं। पूर्णिमापूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।। गुरुगुरु, यानी बृहस्पति। ज्ञान, शिक्षक, धन और संतान; और यह इकलौता ग्रह है जिसकी दृष्टि किसी भाव पर पड़े तो उसे सहारा माना जाता है। नानक गुरुपर्व इसी पूर्णिमा को मनाया जाता है।

दिन तय होता है सूर्योदय के समय की तिथि.

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कार्तिक पूर्णिमा की तिथियाँ

वर्षतारीख़तिथिचंद्र दिन। यह चाँद की एक कला से अगली कला तक चलती है, इसलिए सूर्योदय पर ही शुरू हो, ज़रूरी नहीं। व्रत और त्योहार इसी से तय होते हैं।चंद्र मासचंद्र मास, जिसका नाम पूर्णिमा के नक्षत्र पर पड़ता है। यह लगभग साढ़े उनतीस दिन का होता है, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर से खिसकता रहता है।
2025बुधवारबुधवार, 5 नवंबर 2025Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 08:44 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।
2026मंगलवारमंगलवार, 24 नवंबर 2026Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 10:05 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।
2027रविवाररविवार, 14 नवंबर 2027Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 09:29 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।
2028गुरुवारगुरुवार, 2 नवंबर 2028Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 02:00 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।
2029बुधवारबुधवार, 21 नवंबर 2029Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 08:18 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।
2030रविवाररविवार, 10 नवंबर 2030Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 07:58 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।

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दूसरे पर्व

हर एक अपने नियम और अपनी तिथियों के साथ।

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पूरा कैलेंडर

वर्ष भर के सभी पर्व और व्रत, एक ही सूची में।

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