पर्व
मासिक दुर्गाष्टमी की तिथियाँ
यह हर चंद्र मास में लौटता है, वर्ष में एक बार नहीं, इसलिए नीचे की सूची में इन वर्षों की सारी तिथियाँ हैं।
अन्य नाम: मासिक दुर्गा अष्टमी
अगली बार
मंगलवार, 17 नवंबर 2026
Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।, Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
भद्रा 05:17 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।
पर्व
नियम
तिथि किससे निकाली गई है, इस तरह लिखा हुआ कि आप जाँच सकें।
हर महीने की शुक्ल अष्टमीआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।, दुर्गा के लिए। आश्विनसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है। वाली महाअष्टमी होती है।
दिन तय होता है सूर्योदय के समय की तिथि.
पर्व
मासिक दुर्गाष्टमी की तिथियाँ
| तारीख़ | तिथिचंद्र दिन। यह चाँद की एक कला से अगली कला तक चलती है, इसलिए सूर्योदय पर ही शुरू हो, ज़रूरी नहीं। व्रत और त्योहार इसी से तय होते हैं। | चंद्र मासचंद्र मास, जिसका नाम पूर्णिमा के नक्षत्र पर पड़ता है। यह लगभग साढ़े उनतीस दिन का होता है, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर से खिसकता रहता है। |
|---|---|---|
| 7 जन॰2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।भद्रा 05:26 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 5 फ़र॰2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 01:32 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 7 मार्च2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।भद्रा 10:01 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 5 अप्रैल2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।भद्रा 07:44 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 5 मई2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 07:21 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 3 जून2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।भद्रा 09:10 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 3 जुल॰2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।भद्रा 01:00 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 1 अग॰2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।यह तिथि लगातार दो दिन निर्णायक क्षण को घेरती है, इसलिए कुछ पंचांग इस पर्व को अगले दिन रखते हैं। दोनों पाठ मान्य हैं। | Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।भद्रा 06:11 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 31 अग॰2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।भद्रा 11:55 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 30 सित॰2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।भद्रा 05:23 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 30 अक्टू॰2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 09:50 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 28 नव॰2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 12:28 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 28 दिस॰2025 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।भद्रा 12:39 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 26 जन॰2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 10:17 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 24 फ़र॰2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।यह तिथि दो निर्णायक क्षणों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए नियम अकेले दिन तय नहीं करता। यहाँ वह दिन दिया गया है जिसमें तिथि का अधिकांश भाग पड़ता है। | Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।भद्रा 05:57 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 26 मार्च2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।भद्रा 12:47 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 24 अप्रैल2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 08:01 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 23 मई2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | अधिक Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।भद्रा 04:40 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 22 जून2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।भद्रा 03:25 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 21 जुल॰2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।भद्रा 04:35 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 20 अग॰2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।भद्रा 08:16 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 19 सित॰2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।भद्रा 02:13 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 19 अक्टू॰2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।भद्रा 09:42 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 17 नव॰2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 05:17 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 17 दिस॰2026 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 11:12 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 16 जन॰2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।भद्रा 02:04 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 14 फ़र॰2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 01:28 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 16 मार्च2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।भद्रा 09:55 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 14 अप्रैल2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।भद्रा 04:26 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 13 मई2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 10:13 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 11 जून2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।भद्रा 04:26 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 11 जुल॰2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।भद्रा 12:09 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 9 अग॰2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।भद्रा 10:24 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 8 सित॰2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।भद्रा 12:01 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 7 अक्टू॰2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।यह तिथि लगातार दो दिन निर्णायक क्षण को घेरती है, इसलिए कुछ पंचांग इस पर्व को अगले दिन रखते हैं। दोनों पाठ मान्य हैं। | Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।भद्रा 05:17 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 6 नव॰2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 01:30 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 6 दिस॰2027 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 10:52 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 5 जन॰2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।भद्रा 07:10 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 4 फ़र॰2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 12:40 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 4 मार्च2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।भद्रा 02:32 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 3 अप्रैल2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।भद्रा 12:45 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 2 मई2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 07:55 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 31 मई2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।भद्रा 01:06 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 29 जून2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।यह तिथि दो निर्णायक क्षणों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए नियम अकेले दिन तय नहीं करता। यहाँ वह दिन दिया गया है जिसमें तिथि का अधिकांश भाग पड़ता है। | Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।भद्रा 05:40 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 29 जुल॰2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।भद्रा 11:10 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 27 अग॰2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।भद्रा 07:05 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 26 सित॰2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।भद्रा 06:40 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 25 अक्टू॰2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 10:23 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 24 नव॰2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 05:44 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 24 दिस॰2028 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।भद्रा 03:14 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 23 जन॰2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 12:53 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 22 फ़र॰2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।भद्रा 08:39 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 23 मार्च2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | अधिक Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।भद्रा 01:03 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 22 अप्रैल2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।भद्रा 01:20 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 21 मई2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 09:46 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 19 जून2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।भद्रा 03:24 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 19 जुल॰2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।भद्रा 07:44 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 17 अग॰2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।भद्रा 12:25 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 15 सित॰2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।भद्रा 06:59 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 14 अक्टू॰2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।भद्रा 04:38 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 13 नव॰2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 06:05 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 13 दिस॰2029 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 11:19 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 11 जन॰2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।यह तिथि लगातार दो दिन निर्णायक क्षण को घेरती है, इसलिए कुछ पंचांग इस पर्व को अगले दिन रखते हैं। दोनों पाठ मान्य हैं। | Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।भद्रा 07:36 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 10 फ़र॰2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 05:19 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 12 मार्च2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।भद्रा 02:17 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 11 अप्रैल2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।भद्रा 08:26 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 11 मई2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।भद्रा 10:41 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 9 जून2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।भद्रा 09:05 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 8 जुल॰2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।भद्रा 04:31 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 7 अग॰2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।भद्रा 10:12 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 5 सित॰2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।भद्रा 03:25 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 4 अक्टू॰2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।भद्रा 09:26 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 2 नव॰2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।भद्रा 05:26 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
| 2 दिस॰2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है। | Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।भद्रा 04:26 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है। |
| 31 दिस॰2030 | Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।यह तिथि लगातार दो दिन निर्णायक क्षण को घेरती है, इसलिए कुछ पंचांग इस पर्व को अगले दिन रखते हैं। दोनों पाठ मान्य हैं। | Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।भद्रा 07:06 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं। |
पर्व
दूसरे पर्व
हर एक अपने नियम और अपनी तिथियों के साथ।
पर्व
पूरा कैलेंडर
वर्ष भर के सभी पर्व और व्रत, एक ही सूची में।
हिंदू कैलेंडर