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राहु काल

आज का राहु काल — नया काम न शुरू करने का समय

दिन की रोशनी का एक आठवाँ हिस्सा, जो हर वार अलग खाने में जाता है। परंपरा कहती है इसमें कुछ नया शुरू न कीजिए, और जो काम पहले से चल रहा है उसके बारे में वह कुछ नहीं कहती।

· शुक्रवार

नीचे की खिड़की आगरा के लिए गिनी गई है, क्योंकि यह उसी शहर की दिन-रोशनी का आठवाँ हिस्सा है; अपना शहर चुनिए और यह उस शहर के सूर्योदय से फिर गिनी जाएगी।

इन घंटों से बचें

राहु काल

से

कोई नया काम शुरू न करें — न यात्रा, न ख़रीदारी, न कोई हस्ताक्षर। जो काम पहले से चल रहा है, वह जारी रखना ठीक है।

सूर्योदय05:44 पूर्वाह्नसूर्यास्त07:02 अपराह्नआज का खानाचौथा हिस्सा

इस हफ़्ते

अगले सात दिन का राहु काल

हर पंक्ति अलग से गिनी गई है, आगरामें उस दिन के अपने सूर्योदय और सूर्यास्त से। “हिस्सा” वाला खाना बताता है कि दिन की रोशनी का कौन-सा आठवाँ भाग है, और यही वार से तय होता है, कभी नहीं बदलता।

वारराहु कालहिस्सा
शुक्रवारआज10:43 पूर्वाह्न से 12:23 अपराह्नचौथा
शनिवारशनिवार, 8 अगस्त 202609:04 पूर्वाह्न से 10:43 पूर्वाह्नतीसरा
रविवाररविवार, 9 अगस्त 202605:21 अपराह्न से 07:00 अपराह्नआठवाँ
सोमवारसोमवार, 10 अगस्त 202607:25 पूर्वाह्न से 09:04 पूर्वाह्नदूसरा
मंगलवारमंगलवार, 11 अगस्त 202603:41 अपराह्न से 05:20 अपराह्नसातवाँ
बुधवारबुधवार, 12 अगस्त 202612:22 अपराह्न से 02:01 अपराह्नपाँचवाँ
गुरुवारगुरुवार, 13 अगस्त 202602:01 अपराह्न से 03:40 अपराह्नछठा

यह है क्या

राहु काल असल में है क्या

सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच का समय लीजिए और उसे आठ बराबर हिस्सों में काट दीजिए। इन आठ में से एक राहु काल है, और कौन-सा, यह सिर्फ़ वार तय करता है।

वारकौन-सा हिस्सा
रविवारआठवाँ
सोमवारदूसरा
मंगलवारसातवाँ
बुधवारपाँचवाँ
गुरुवारछठा
शुक्रवारचौथा
शनिवारतीसरा

सूर्योदय के तुरंत बाद वाला पहला हिस्सा किसी भी वार को राहु काल नहीं होता।

पूरी गणना बस इतनी है। इसीलिए दिल्ली में यह खिड़की लगभग नब्बे मिनट की होती है और ठीक नब्बे कहीं नहीं होती। दिल्ली की जून में करीब एक सौ दो मिनट, दिसंबर में करीब अस्सी। जो साइट सपाट “90 मिनट” लिखती है, वह उस बारह घंटे के दिन का औसत बता रही है जो असल में किसी का होता ही नहीं।

सीधी बात

और यह क्या नहीं है

राहु काल शुरुआत के बारे में एक रिवाज़ है। परंपरा इसमें कुछ नया शुरू करने से रोकती है: यात्रा, ख़रीदारी, हस्ताक्षर, पहली मुलाक़ात। जो काम पहले से चल रहा है उसके बारे में यह कुछ नहीं कहती, और कहीं कोई नियम नहीं है कि आप चलता काम रोक दें, ट्रेन रद्द कर दें या डेढ़ घंटे बैठे रहें।

यह भविष्यवाणी भी नहीं है। इस पेज पर कहीं यह नहीं लिखा कि उन दो समयों के बीच आपके साथ कुछ बुरा होगा, और जो पेज ऐसा कहता है वह परंपरा छोड़कर डराने लगा है। बहुत से लोग इसे बड़े कामों के लिए मानते हैं और रोज़मर्रा में नहीं, और यह भी इसे निभाने का पूरी तरह सामान्य तरीक़ा है।

एक काम की बात: दक्षिण भारत में इसी खिड़की को राहु कालम (rahu kalam) कहते हैं, और गणना बिलकुल यही है।

इसके दो साथी

यमगंड और गुलिक काल

उसी दिन-रोशनी के दो और आठवें हिस्से, दोनों उसी तरह वार से तय, दोनों परंपरा में एक सीमित तरह की शुरुआत के लिए टाले जाते हैं। ये आगरा के लिए आज गिने गए हैं।

  • से

    यमगंड

    यात्रा और सेहत से जुड़े कामों के लिए टाला जाता है।

  • से

    गुलिक काल

    लेन-देन और लंबे वादों के लिए टाला जाता है।

आज और भी

दिन का बाक़ी हिसाब

आपका शहर

अपने शहर का राहु काल

किसी एक वार को हिस्सा हर जगह वही रहता है; घड़ी का समय नहीं, क्योंकि वह आपकी अपनी दिन-रोशनी का एक भाग है। उसी मंगलवार को चेन्नई का राहु काल अहमदाबाद से पहले खुलता और पहले बंद होता है।

आपकी कुंडली

अपनी कुंडली चाहिए?

राहु काल एक शहर में सबके लिए एक ही घंटा है। आपकी कुंडली में राहु कहाँ बैठा है, यह अलग सवाल है, और उसके लिए आपकी जन्म तारीख़, समय और स्थान चाहिए।

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यह पेज कैसे निकाला जाता है

  • सूर्योदय और सूर्यास्त हमारे अपने गणना इंजन से आगरा के अपने निर्देशांक (27.1767°N, 78.0081°E) के लिए निकाले जाते हैं।
  • राहु काल, यमगंड और गुलिक इन्हीं दोनों के बीच के असल अंतराल के ठीक आठवें हिस्से हैं, उसी खाने पर जो वार तय करता है।
  • ऊपर की सातों पंक्तियाँ उस दिन के अपने सूर्योदय के लिए अलग-अलग गिनी गई हैं, आज वाली दोहराई नहीं गई।
  • सभी समय भारतीय मानक समय में हैं।