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पंचक

पंचक 2025 की तिथियाँ और समय

2025 में पंचक 14 बार लगेगा। पंचक वह लगभग साढ़े चार दिन की अवधि है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहता है, यानी धनिष्ठा के तीसरे चरण से रेवती के अंत तक। हर खिड़की का आरंभ, समाप्ति और प्रकार नीचे दिया गया है।

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं। पंचक और भद्रा चंद्रमा की स्थिति से तय होते हैं, जो पूरी पृथ्वी के लिए एक ही क्षण पर बदलती है, इसलिए यही समय पूरे भारत में लागू हैं।

अभी पंचक है या नहीं

पंचक अभी चल रहा हैपंचक

मंगलवार, 1 सितंबर 2026, 03:23 पूर्वाह्न IST को समाप्त

पंचक

2025 की सभी पंचक खिड़कियाँ

14 खिड़कियाँ

जनवरी 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
शुक्र, 3 जन॰10:47 पूर्वाह्नमंगल, 7 जन॰05:50 अपराह्न4 दिन 7 घं 2 मिचोर पंचकशुक्रवार से शुरू, चोरी और धन-हानि
गुरु, 30 जन॰06:35 अपराह्नसोम, 3 फ़र॰11:16 अपराह्न4 दिन 4 घं 42 मिपंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है

फ़रवरी 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
गुरु, 27 फ़र॰04:37 पूर्वाह्नसोम, 3 मार्च06:39 पूर्वाह्न4 दिन 2 घं 2 मिपंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है

मार्च 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
बुध, 26 मार्च03:14 अपराह्नरवि, 30 मार्च04:35 अपराह्न4 दिन 1 घं 20 मिपंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है

अप्रैल 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
बुध, 23 अप्रैल12:31 पूर्वाह्नरवि, 27 अप्रैल03:38 पूर्वाह्न4 दिन 3 घं 8 मिपंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है

मई 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
मंगल, 20 मई07:35 पूर्वाह्नशनि, 24 मई01:48 अपराह्न4 दिन 6 घं 13 मिअग्नि पंचकमंगलवार से शुरू, आग और औज़ारों से हानि

जून 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
सोम, 16 जून01:09 अपराह्नशुक्र, 20 जून09:45 अपराह्न4 दिन 8 घं 35 मिराज पंचकसोमवार से शुरू, सरकार या अधिकारियों से विवाद

जुलाई 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
रवि, 13 जुल॰06:53 अपराह्नशुक्र, 18 जुल॰03:39 पूर्वाह्न4 दिन 8 घं 46 मिरोग पंचकरविवार से शुरू, रोग और अस्वस्थता की आशंका

अगस्त 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
रवि, 10 अग॰02:11 पूर्वाह्नगुरु, 14 अग॰09:05 पूर्वाह्न4 दिन 6 घं 55 मिरोग पंचकरविवार से शुरू, रोग और अस्वस्थता की आशंका

सितंबर 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
शनि, 6 सित॰11:21 पूर्वाह्नबुध, 10 सित॰04:03 अपराह्न4 दिन 4 घं 42 मिमृत्यु पंचकशनिवार से शुरू, सबसे कठोर पंचक

अक्टूबर 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
शुक्र, 3 अक्टू॰09:27 अपराह्नबुध, 8 अक्टू॰01:28 पूर्वाह्न4 दिन 4 घं 1 मिचोर पंचकशुक्रवार से शुरू, चोरी और धन-हानि
शुक्र, 31 अक्टू॰06:48 पूर्वाह्नमंगल, 4 नव॰12:34 अपराह्न4 दिन 5 घं 46 मिचोर पंचकशुक्रवार से शुरू, चोरी और धन-हानि

नवंबर 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
गुरु, 27 नव॰02:07 अपराह्नसोम, 1 दिस॰11:18 अपराह्न4 दिन 9 घं 11 मिपंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है

दिसंबर 2025

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
बुध, 24 दिस॰07:46 अपराह्नसोम, 29 दिस॰07:40 पूर्वाह्न4 दिन 11 घं 55 मिपंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है

पंचक

प्रकार और उनका अर्थ

  • रोग पंचकरविवार से शुरू, रोग और अस्वस्थता की आशंका
  • राज पंचकसोमवार से शुरू, सरकार या अधिकारियों से विवाद
  • अग्नि पंचकमंगलवार से शुरू, आग और औज़ारों से हानि
  • पंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है
  • चोर पंचकशुक्रवार से शुरू, चोरी और धन-हानि
  • मृत्यु पंचकशनिवार से शुरू, सबसे कठोर पंचक

पंचक

पंचक क्या है

सत्ताईस नक्षत्रों में अंतिम पाँच, धनिष्ठा का उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती, मिलकर पंचक कहलाते हैं। धनिष्ठा का तीसरा चरण ठीक कुंभ राशि के आरंभ पर पड़ता है और रेवती मीन के अंत पर, इसलिए नियम सीधा है: जब तक चंद्रमा कुंभ या मीन में है, पंचक चल रहा है।

चंद्रमा हर साढ़े सत्ताईस दिन में एक बार इन दो राशियों से गुज़रता है और वहाँ लगभग साढ़े चार दिन रहता है, इसलिए वर्ष में तेरह के आसपास पंचक आते हैं। इस पेज की हर खिड़की चंद्रमा के कुंभ में प्रवेश और मीन से निकलने के वास्तविक क्षण से गिनी गई है, किसी सूची से नक़ल नहीं।

पंचक का नाम उस वार से पड़ता है जिस दिन वह शुरू होता है। रविवार का रोग पंचक, सोमवार का राज पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक और शनिवार का मृत्यु पंचक। बुधवार और गुरुवार से शुरू होने वाला पंचक दोष रहित माना जाता है।

पंचक

पंचक में कौन से पाँच काम टाले जाते हैं

  1. लकड़ी, ईंधन या घास इकट्ठा करना और उसका संग्रह
  2. छत डालना या मकान की छत का काम शुरू करना
  3. चारपाई, पलंग या बिस्तर बनवाना और ख़रीदना
  4. दक्षिण दिशा की यात्रा
  5. दाह संस्कार, जिसके लिए पंचक में शांति का विशेष विधान है

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सवाल

क्या पंचक में शादी या गृह प्रवेश हो सकता है?
परंपरा पंचक में केवल पाँच विशेष काम टालने को कहती है, हर शुभ कार्य नहीं। विवाह, सगाई और गृह प्रवेश के लिए पंचक अपने आप में बाधा नहीं है, हालाँकि कई परिवार मृत्यु पंचक और रोग पंचक में बड़े आयोजन टालते हैं। मुहूर्त पंचांग के बाक़ी अंगों से तय होता है।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए सही हैं?
हाँ, पूरे भारत के लिए। चंद्रमा का राशि बदलना पूरी पृथ्वी के लिए एक ही क्षण पर होता है, इसलिए पंचक का आरंभ और अंत हर शहर में एक ही समय पर पड़ता है। यहाँ सारे समय भारतीय मानक समय में हैं।
पंचक और भद्रा में क्या अंतर है?
पंचक चंद्रमा की राशि से तय होता है और साढ़े चार दिन चलता है। भद्रा विष्टि करण है, आधी तिथि की अवधि, जो हर चंद्र मास में आठ बार आती है और हर बार लगभग बारह घंटे रहती है। दोनों अलग नियम हैं और दोनों एक साथ भी पड़ सकते हैं।
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