पंचक
पंचक 2030 की तिथियाँ और समय
2030 में पंचक 14 बार लगेगा। पंचक वह लगभग साढ़े चार दिन की अवधि है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहता है, यानी धनिष्ठा के तीसरे चरण से रेवती के अंत तक। हर खिड़की का आरंभ, समाप्ति और प्रकार नीचे दिया गया है।
सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं। पंचक और भद्रा चंद्रमा की स्थिति से तय होते हैं, जो पूरी पृथ्वी के लिए एक ही क्षण पर बदलती है, इसलिए यही समय पूरे भारत में लागू हैं।
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पंचक अभी चल रहा हैपंचक
मंगलवार, 1 सितंबर 2026, 03:23 पूर्वाह्न IST को समाप्त
पंचक
2030 की सभी पंचक खिड़कियाँ
14 खिड़कियाँ
जनवरी 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| सोम, 7 जन॰06:23 पूर्वाह्न | शनि, 12 जन॰01:23 पूर्वाह्न | 4 दिन 19 घं | राज पंचकसोमवार से शुरू, सरकार या अधिकारियों से विवाद |
फ़रवरी 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| रवि, 3 फ़र॰04:09 अपराह्न | शुक्र, 8 फ़र॰09:47 पूर्वाह्न | 4 दिन 17 घं 38 मि | रोग पंचकरविवार से शुरू, रोग और अस्वस्थता की आशंका |
मार्च 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| रवि, 3 मार्च12:15 पूर्वाह्न | गुरु, 7 मार्च06:02 अपराह्न | 4 दिन 17 घं 47 मि | रोग पंचकरविवार से शुरू, रोग और अस्वस्थता की आशंका |
| शनि, 30 मार्च06:23 पूर्वाह्न | गुरु, 4 अप्रैल01:22 पूर्वाह्न | 4 दिन 18 घं 59 मि | मृत्यु पंचकशनिवार से शुरू, सबसे कठोर पंचक |
अप्रैल 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 26 अप्रैल11:50 पूर्वाह्न | बुध, 1 मई07:37 पूर्वाह्न | 4 दिन 19 घं 47 मि | चोर पंचकशुक्रवार से शुरू, चोरी और धन-हानि |
मई 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| गुरु, 23 मई06:21 अपराह्न | मंगल, 28 मई01:26 अपराह्न | 4 दिन 19 घं 5 मि | पंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है |
जून 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| गुरु, 20 जून02:47 पूर्वाह्न | सोम, 24 जून07:44 अपराह्न | 4 दिन 16 घं 57 मि | पंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है |
जुलाई 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| बुध, 17 जुल॰12:33 अपराह्न | सोम, 22 जुल॰03:08 पूर्वाह्न | 4 दिन 14 घं 34 मि | पंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है |
अगस्त 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| मंगल, 13 अग॰10:17 अपराह्न | रवि, 18 अग॰11:30 पूर्वाह्न | 4 दिन 13 घं 13 मि | अग्नि पंचकमंगलवार से शुरू, आग और औज़ारों से हानि |
सितंबर 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| मंगल, 10 सित॰06:37 पूर्वाह्न | शनि, 14 सित॰08:06 अपराह्न | 4 दिन 13 घं 29 मि | अग्नि पंचकमंगलवार से शुरू, आग और औज़ारों से हानि |
अक्टूबर 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| सोम, 7 अक्टू॰01:03 अपराह्न | शनि, 12 अक्टू॰04:00 पूर्वाह्न | 4 दिन 14 घं 57 मि | राज पंचकसोमवार से शुरू, सरकार या अधिकारियों से विवाद |
नवंबर 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| रवि, 3 नव॰06:29 अपराह्न | शुक्र, 8 नव॰10:40 पूर्वाह्न | 4 दिन 16 घं 11 मि | रोग पंचकरविवार से शुरू, रोग और अस्वस्थता की आशंका |
दिसंबर 2030
| शुरू | समाप्त | अवधि | प्रकार |
|---|---|---|---|
| रवि, 1 दिस॰12:55 पूर्वाह्न | गुरु, 5 दिस॰04:29 अपराह्न | 4 दिन 15 घं 34 मि | रोग पंचकरविवार से शुरू, रोग और अस्वस्थता की आशंका |
| शनि, 28 दिस॰09:48 पूर्वाह्न | बुध, 1 जन॰10:39 अपराह्न | 4 दिन 12 घं 52 मि | मृत्यु पंचकशनिवार से शुरू, सबसे कठोर पंचक |
पंचक
प्रकार और उनका अर्थ
- रोग पंचकरविवार से शुरू, रोग और अस्वस्थता की आशंका
- राज पंचकसोमवार से शुरू, सरकार या अधिकारियों से विवाद
- अग्नि पंचकमंगलवार से शुरू, आग और औज़ारों से हानि
- पंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है
- चोर पंचकशुक्रवार से शुरू, चोरी और धन-हानि
- मृत्यु पंचकशनिवार से शुरू, सबसे कठोर पंचक
पंचक
पंचक क्या है
सत्ताईस नक्षत्रों में अंतिम पाँच, धनिष्ठा का उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती, मिलकर पंचक कहलाते हैं। धनिष्ठा का तीसरा चरण ठीक कुंभ राशि के आरंभ पर पड़ता है और रेवती मीन के अंत पर, इसलिए नियम सीधा है: जब तक चंद्रमा कुंभ या मीन में है, पंचक चल रहा है।
चंद्रमा हर साढ़े सत्ताईस दिन में एक बार इन दो राशियों से गुज़रता है और वहाँ लगभग साढ़े चार दिन रहता है, इसलिए वर्ष में तेरह के आसपास पंचक आते हैं। इस पेज की हर खिड़की चंद्रमा के कुंभ में प्रवेश और मीन से निकलने के वास्तविक क्षण से गिनी गई है, किसी सूची से नक़ल नहीं।
पंचक का नाम उस वार से पड़ता है जिस दिन वह शुरू होता है। रविवार का रोग पंचक, सोमवार का राज पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक और शनिवार का मृत्यु पंचक। बुधवार और गुरुवार से शुरू होने वाला पंचक दोष रहित माना जाता है।
पंचक
पंचक में कौन से पाँच काम टाले जाते हैं
- लकड़ी, ईंधन या घास इकट्ठा करना और उसका संग्रह
- छत डालना या मकान की छत का काम शुरू करना
- चारपाई, पलंग या बिस्तर बनवाना और ख़रीदना
- दक्षिण दिशा की यात्रा
- दाह संस्कार, जिसके लिए पंचक में शांति का विशेष विधान है
पंचक
सवाल
- क्या पंचक में शादी या गृह प्रवेश हो सकता है?
- परंपरा पंचक में केवल पाँच विशेष काम टालने को कहती है, हर शुभ कार्य नहीं। विवाह, सगाई और गृह प्रवेश के लिए पंचक अपने आप में बाधा नहीं है, हालाँकि कई परिवार मृत्यु पंचक और रोग पंचक में बड़े आयोजन टालते हैं। मुहूर्त पंचांग के बाक़ी अंगों से तय होता है।
- क्या ये समय मेरे शहर के लिए सही हैं?
- हाँ, पूरे भारत के लिए। चंद्रमा का राशि बदलना पूरी पृथ्वी के लिए एक ही क्षण पर होता है, इसलिए पंचक का आरंभ और अंत हर शहर में एक ही समय पर पड़ता है। यहाँ सारे समय भारतीय मानक समय में हैं।
- पंचक और भद्रा में क्या अंतर है?
- पंचक चंद्रमा की राशि से तय होता है और साढ़े चार दिन चलता है। भद्रा विष्टि करण है, आधी तिथि की अवधि, जो हर चंद्र मास में आठ बार आती है और हर बार लगभग बारह घंटे रहती है। दोनों अलग नियम हैं और दोनों एक साथ भी पड़ सकते हैं।