Modern Panditji

पंचक

पंचक 2029 की तिथियाँ और समय

2029 में पंचक 13 बार लगेगा। पंचक वह लगभग साढ़े चार दिन की अवधि है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में रहता है, यानी धनिष्ठा के तीसरे चरण से रेवती के अंत तक। हर खिड़की का आरंभ, समाप्ति और प्रकार नीचे दिया गया है।

सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं। पंचक और भद्रा चंद्रमा की स्थिति से तय होते हैं, जो पूरी पृथ्वी के लिए एक ही क्षण पर बदलती है, इसलिए यही समय पूरे भारत में लागू हैं।

अभी पंचक है या नहीं

पंचक अभी चल रहा हैपंचक

मंगलवार, 1 सितंबर 2026, 03:23 पूर्वाह्न IST को समाप्त

पंचक

2029 की सभी पंचक खिड़कियाँ

13 खिड़कियाँ

जनवरी 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
बुध, 17 जन॰07:04 पूर्वाह्नसोम, 22 जन॰07:11 पूर्वाह्न5 दिन 0 घं 7 मिपंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है

फ़रवरी 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
मंगल, 13 फ़र॰02:34 अपराह्नरवि, 18 फ़र॰02:41 अपराह्न5 दिन 0 घं 7 मिअग्नि पंचकमंगलवार से शुरू, आग और औज़ारों से हानि

मार्च 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
सोम, 12 मार्च08:43 अपराह्नशनि, 17 मार्च09:12 अपराह्न5 दिन 0 घं 29 मिराज पंचकसोमवार से शुरू, सरकार या अधिकारियों से विवाद

अप्रैल 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
सोम, 9 अप्रैल02:25 पूर्वाह्नशनि, 14 अप्रैल03:13 पूर्वाह्न5 दिन 0 घं 47 मिराज पंचकसोमवार से शुरू, सरकार या अधिकारियों से विवाद

मई 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
रवि, 6 मई08:55 पूर्वाह्नशुक्र, 11 मई09:26 पूर्वाह्न5 दिन 0 घं 31 मिरोग पंचकरविवार से शुरू, रोग और अस्वस्थता की आशंका

जून 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
शनि, 2 जून04:50 अपराह्नगुरु, 7 जून04:22 अपराह्न4 दिन 23 घं 32 मिमृत्यु पंचकशनिवार से शुरू, सबसे कठोर पंचक
शनि, 30 जून01:43 पूर्वाह्नगुरु, 5 जुल॰12:03 पूर्वाह्न4 दिन 22 घं 20 मिमृत्यु पंचकशनिवार से शुरू, सबसे कठोर पंचक

जुलाई 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
शुक्र, 27 जुल॰10:30 पूर्वाह्नबुध, 1 अग॰08:02 पूर्वाह्न4 दिन 21 घं 32 मिचोर पंचकशुक्रवार से शुरू, चोरी और धन-हानि

अगस्त 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
गुरु, 23 अग॰06:11 अपराह्नमंगल, 28 अग॰03:41 अपराह्न4 दिन 21 घं 30 मिपंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है

सितंबर 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
गुरु, 20 सित॰12:30 पूर्वाह्नसोम, 24 सित॰10:36 अपराह्न4 दिन 22 घं 7 मिपंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है

अक्टूबर 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
बुध, 17 अक्टू॰06:06 पूर्वाह्नसोम, 22 अक्टू॰04:52 पूर्वाह्न4 दिन 22 घं 46 मिपंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है

नवंबर 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
मंगल, 13 नव॰12:25 अपराह्नरवि, 18 नव॰10:59 पूर्वाह्न4 दिन 22 घं 35 मिअग्नि पंचकमंगलवार से शुरू, आग और औज़ारों से हानि

दिसंबर 2029

शुरूसमाप्तअवधिप्रकार
सोम, 10 दिस॰08:36 अपराह्नशनि, 15 दिस॰05:42 अपराह्न4 दिन 21 घं 6 मिराज पंचकसोमवार से शुरू, सरकार या अधिकारियों से विवाद

पंचक

प्रकार और उनका अर्थ

  • रोग पंचकरविवार से शुरू, रोग और अस्वस्थता की आशंका
  • राज पंचकसोमवार से शुरू, सरकार या अधिकारियों से विवाद
  • अग्नि पंचकमंगलवार से शुरू, आग और औज़ारों से हानि
  • पंचकबुधवार या गुरुवार से शुरू, दोष रहित माना जाता है
  • चोर पंचकशुक्रवार से शुरू, चोरी और धन-हानि
  • मृत्यु पंचकशनिवार से शुरू, सबसे कठोर पंचक

पंचक

पंचक क्या है

सत्ताईस नक्षत्रों में अंतिम पाँच, धनिष्ठा का उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद और रेवती, मिलकर पंचक कहलाते हैं। धनिष्ठा का तीसरा चरण ठीक कुंभ राशि के आरंभ पर पड़ता है और रेवती मीन के अंत पर, इसलिए नियम सीधा है: जब तक चंद्रमा कुंभ या मीन में है, पंचक चल रहा है।

चंद्रमा हर साढ़े सत्ताईस दिन में एक बार इन दो राशियों से गुज़रता है और वहाँ लगभग साढ़े चार दिन रहता है, इसलिए वर्ष में तेरह के आसपास पंचक आते हैं। इस पेज की हर खिड़की चंद्रमा के कुंभ में प्रवेश और मीन से निकलने के वास्तविक क्षण से गिनी गई है, किसी सूची से नक़ल नहीं।

पंचक का नाम उस वार से पड़ता है जिस दिन वह शुरू होता है। रविवार का रोग पंचक, सोमवार का राज पंचक, मंगलवार का अग्नि पंचक, शुक्रवार का चोर पंचक और शनिवार का मृत्यु पंचक। बुधवार और गुरुवार से शुरू होने वाला पंचक दोष रहित माना जाता है।

पंचक

पंचक में कौन से पाँच काम टाले जाते हैं

  1. लकड़ी, ईंधन या घास इकट्ठा करना और उसका संग्रह
  2. छत डालना या मकान की छत का काम शुरू करना
  3. चारपाई, पलंग या बिस्तर बनवाना और ख़रीदना
  4. दक्षिण दिशा की यात्रा
  5. दाह संस्कार, जिसके लिए पंचक में शांति का विशेष विधान है

पंचक

सवाल

क्या पंचक में शादी या गृह प्रवेश हो सकता है?
परंपरा पंचक में केवल पाँच विशेष काम टालने को कहती है, हर शुभ कार्य नहीं। विवाह, सगाई और गृह प्रवेश के लिए पंचक अपने आप में बाधा नहीं है, हालाँकि कई परिवार मृत्यु पंचक और रोग पंचक में बड़े आयोजन टालते हैं। मुहूर्त पंचांग के बाक़ी अंगों से तय होता है।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए सही हैं?
हाँ, पूरे भारत के लिए। चंद्रमा का राशि बदलना पूरी पृथ्वी के लिए एक ही क्षण पर होता है, इसलिए पंचक का आरंभ और अंत हर शहर में एक ही समय पर पड़ता है। यहाँ सारे समय भारतीय मानक समय में हैं।
पंचक और भद्रा में क्या अंतर है?
पंचक चंद्रमा की राशि से तय होता है और साढ़े चार दिन चलता है। भद्रा विष्टि करण है, आधी तिथि की अवधि, जो हर चंद्र मास में आठ बार आती है और हर बार लगभग बारह घंटे रहती है। दोनों अलग नियम हैं और दोनों एक साथ भी पड़ सकते हैं।
पंडितजी से पूछें