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हिंदू कैलेंडर

हिंदू कैलेंडर 2025 — त्योहारों की तिथियाँ

2025 के सभी हिंदू पर्व, हर एक की तिथि और उसे तय करने वाले नियम के साथ। तिथियाँ चंद्रमा और सूर्य से गणना की गई हैं, और जहाँ पंचांगों में सचमुच मतभेद है वहाँ पर्व के साथ यही लिखा है, किसी एक पक्ष को चुपचाप चुना नहीं गया।

Delhi के लिए गणना, वही संदर्भ मध्याह्न रेखा जिस पर भारतीय पंचांग छपते हैं। त्योहारों की तिथियाँ शहर के हिसाब से नहीं छापी जातीं: जो दिवाली दिल्ली और चेन्नई के बीच बदल जाए वह योजना बनाने के काम की नहीं रहती।

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2025 के त्योहार

नामी वार्षिक पर्व, तिथि क्रम में। किसी पर भी जाइए और उसका नियम, उसकी तिथि तथा दूसरे वर्षों की तारीख़ें मिलेंगी।

तिथिपर्वतिथि नामचंद्र दिन। यह चाँद की एक कला से अगली कला तक चलती है, इसलिए सूर्योदय पर ही शुरू हो, ज़रूरी नहीं। व्रत और त्योहार इसी से तय होते हैं।
14 जन॰मंगलवारमकर संक्रांति—
2 फ़र॰रविवारवसंत पंचमीयह तिथि दो निर्णायक क्षणों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए नियम अकेले दिन तय नहीं करता। यहाँ वह दिन दिया गया है जिसमें तिथि का अधिकांश भाग पड़ता है।Shukla Panchamiपाँचवीं तिथि। वसंत पंचमी और नाग पंचमी दोनों इसी के नाम पर हैं, और पढ़ाई तथा नई सीख के लिए यह अच्छी मानी जाती है।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
26 फ़र॰बुधवारमहाशिवरात्रिभद्रा 10:05 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
13 मार्चगुरुवारहोलिका दहनभद्रा 11:27 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
14 मार्चशुक्रवारहोलीभद्रा 11:27 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
30 मार्चरविवारगुड़ी पड़वाShukla Pratipadaपक्ष की पहली तिथि, अमावस्या या पूर्णिमा के अगले दिन। चंद्र वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही शुरू होता है।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
6 अप्रैलरविवारराम नवमीShukla Navamiनवीं तिथि। राम नवमी और महानवमी इसी पर पड़ती हैं, फिर भी यह रिक्ता तिथियों में गिनी जाती है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
12 अप्रैलशनिवारहनुमान जयंतीभद्रा 04:36 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
14 अप्रैलसोमवारमेष संक्रांति—
30 अप्रैलबुधवारअक्षय तृतीयाShukla Tritiyaतीसरी तिथि। वैशाख की अक्षय तृतीया और सावन की हरियाली तीज इसी पर पड़ती हैं, और विवाह के लिए यह मान्य है।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
12 मईसोमवारबुद्ध पूर्णिमाभद्रा 09:15 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
27 जूनशुक्रवाररथ यात्राShukla Dwitiyaदूसरी तिथि। विवाह के लिए मान्य तिथियों में यह भी है, और दिवाली के ठीक बाद वाली द्वितीया को भाई दूज पड़ता है।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
10 जुल॰गुरुवारगुरु पूर्णिमाभद्रा 01:55 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
29 जुल॰मंगलवारनाग पंचमीShukla Panchamiपाँचवीं तिथि। वसंत पंचमी और नाग पंचमी दोनों इसी के नाम पर हैं, और पढ़ाई तथा नई सीख के लिए यह अच्छी मानी जाती है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
9 अग॰शनिवाररक्षाबंधनभद्रा 01:52 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
16 अग॰शनिवारकृष्ण जन्माष्टमीKrishna Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
26 अग॰मंगलवारहरतालिका तीजShukla Tritiyaतीसरी तिथि। वैशाख की अक्षय तृतीया और सावन की हरियाली तीज इसी पर पड़ती हैं, और विवाह के लिए यह मान्य है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
27 अग॰बुधवारगणेश चतुर्थीभद्रा 03:44 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
6 सित॰शनिवारअनंत चतुर्दशीShukla Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
7 सित॰रविवारपितृ पक्ष आरंभभद्रा 12:43 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
21 सित॰रविवारसर्व पितृ अमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
22 सित॰सोमवारशारदीय नवरात्रि आरंभShukla Pratipadaपक्ष की पहली तिथि, अमावस्या या पूर्णिमा के अगले दिन। चंद्र वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही शुरू होता है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
30 सित॰मंगलवारदुर्गा अष्टमीभद्रा 05:23 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
1 अक्टू॰बुधवारमहानवमीShukla Navamiनवीं तिथि। राम नवमी और महानवमी इसी पर पड़ती हैं, फिर भी यह रिक्ता तिथियों में गिनी जाती है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
2 अक्टू॰गुरुवारविजयादशमीShukla Dashamiदसवीं तिथि, आश्विन में दशहरा इसी पर पड़ता है। विवाह और नई शुरुआत के लिए यह साफ़ तिथियों में गिनी जाती है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
6 अक्टू॰सोमवारशरद पूर्णिमाभद्रा 10:53 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
10 अक्टू॰शुक्रवारकरवा चौथयह तिथि दो निर्णायक क्षणों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए नियम अकेले दिन तय नहीं करता। यहाँ वह दिन दिया गया है जिसमें तिथि का अधिकांश भाग पड़ता है।Krishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
18 अक्टू॰शनिवारधनतेरसKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
20 अक्टू॰सोमवारदीपावलीAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
20 अक्टू॰सोमवारनरक चतुर्दशीभद्रा 02:46 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
22 अक्टू॰बुधवारगोवर्धन पूजाShukla Pratipadaपक्ष की पहली तिथि, अमावस्या या पूर्णिमा के अगले दिन। चंद्र वर्ष भी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही शुरू होता है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
23 अक्टू॰गुरुवारभाई दूजShukla Dwitiyaदूसरी तिथि। विवाह के लिए मान्य तिथियों में यह भी है, और दिवाली के ठीक बाद वाली द्वितीया को भाई दूज पड़ता है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
27 अक्टू॰सोमवारछठ पूजायह तिथि लगातार दो दिन निर्णायक क्षण को घेरती है, इसलिए कुछ पंचांग इस पर्व को अगले दिन रखते हैं। दोनों पाठ मान्य हैं।Shukla Shashthiछठी तिथि, कार्तिकेय और संतान से जुड़े कर्मों की। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी ही छठ है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
2 नव॰रविवारदेवउठनी एकादशीभद्रा 07:32 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
5 नव॰बुधवारकार्तिक पूर्णिमाभद्रा 08:44 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
1 दिस॰सोमवारगीता जयंतीभद्रा 07:01 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।

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एकादशी, पूर्णिमा और मासिक व्रत

ये हर चंद्र मास में लौटते हैं, वर्ष में एक बार नहीं, इसलिए इनकी संख्या लगभग एक सौ बीस है। अकेली एकादशी चौबीस बार आती है।

तिथिपर्वतिथि नामचंद्र दिन। यह चाँद की एक कला से अगली कला तक चलती है, इसलिए सूर्योदय पर ही शुरू हो, ज़रूरी नहीं। व्रत और त्योहार इसी से तय होते हैं।
3 जन॰शुक्रवारविनायक चतुर्थीभद्रा 11:40 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
7 जन॰मंगलवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 05:26 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
10 जन॰शुक्रवारएकादशीभद्रा 10:20 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
11 जन॰शनिवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
13 जन॰सोमवारपूर्णिमाभद्रा 04:26 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
17 जन॰शुक्रवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
25 जन॰शनिवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
27 जन॰सोमवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 08:10 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
27 जन॰सोमवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
29 जन॰बुधवारअमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
1 फ़र॰शनिवारविनायक चतुर्थीभद्रा 09:14 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
5 फ़र॰बुधवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 01:32 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
8 फ़र॰शनिवारएकादशीभद्रा 08:16 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
10 फ़र॰सोमवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
12 फ़र॰बुधवारपूर्णिमाभद्रा 07:05 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
16 फ़र॰रविवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
24 फ़र॰सोमवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
25 फ़र॰मंगलवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
26 फ़र॰बुधवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 10:05 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
27 फ़र॰गुरुवारअमावस्यायह तिथि दो निर्णायक क्षणों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए नियम अकेले दिन तय नहीं करता। यहाँ वह दिन दिया गया है जिसमें तिथि का अधिकांश भाग पड़ता है।Amavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Maghaग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
3 मार्चसोमवारविनायक चतुर्थीभद्रा 06:02 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
7 मार्चशुक्रवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 10:01 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
10 मार्चसोमवारएकादशीभद्रा 07:45 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
11 मार्चमंगलवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
14 मार्चशुक्रवारपूर्णिमाभद्रा 11:27 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
17 मार्चसोमवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
25 मार्चमंगलवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
27 मार्चगुरुवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 09:32 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
27 मार्चगुरुवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
29 मार्चशनिवारअमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Phalgunaबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है।
1 अप्रैलमंगलवारविनायक चतुर्थीभद्रा 02:32 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
5 अप्रैलशनिवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 07:44 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
8 अप्रैलमंगलवारएकादशीभद्रा 09:13 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
10 अप्रैलगुरुवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
12 अप्रैलशनिवारपूर्णिमाभद्रा 04:36 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
16 अप्रैलबुधवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
24 अप्रैलगुरुवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
25 अप्रैलशुक्रवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
26 अप्रैलशनिवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 06:41 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
27 अप्रैलरविवारअमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Chaitraपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है।
1 मईगुरुवारविनायक चतुर्थीयह तिथि दो निर्णायक क्षणों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए नियम अकेले दिन तय नहीं करता। यहाँ वह दिन दिया गया है जिसमें तिथि का अधिकांश भाग पड़ता है।भद्रा 11:24 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
5 मईसोमवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 07:21 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
8 मईगुरुवारएकादशीभद्रा 12:29 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
9 मईशुक्रवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
12 मईसोमवारपूर्णिमाभद्रा 09:15 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
16 मईशुक्रवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
23 मईशुक्रवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
24 मईशनिवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
25 मईरविवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 02:02 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
27 मईमंगलवारअमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Vaishakhaदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।
30 मईशुक्रवारविनायक चतुर्थीभद्रा 09:23 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।
3 जूनमंगलवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 09:10 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।
6 जूनशुक्रवारएकादशीभद्रा 04:48 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।
8 जूनरविवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।
11 जूनबुधवारपूर्णिमाभद्रा 12:27 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।
14 जूनशनिवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।
21 जूनशनिवारएकादशीयह तिथि दो निर्णायक क्षणों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए नियम अकेले दिन तय नहीं करता। यहाँ वह दिन दिया गया है जिसमें तिथि का अधिकांश भाग पड़ता है।Krishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।
23 जूनसोमवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 08:34 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।
23 जूनसोमवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।
25 जूनबुधवारअमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Jyeshthaतीसरा चंद्र मास, मई से जून तक, और बारहों में सबसे गरम। गंगा दशहरा और वट सावित्री दोनों इसी में पड़ते हैं।
28 जूनशनिवारविनायक चतुर्थीभद्रा 09:15 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
3 जुल॰गुरुवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 01:00 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
6 जुल॰रविवारएकादशीभद्रा 09:15 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
8 जुल॰मंगलवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
10 जुल॰गुरुवारपूर्णिमाभद्रा 01:55 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
14 जुल॰सोमवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
21 जुल॰सोमवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
22 जुल॰मंगलवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
23 जुल॰बुधवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 03:32 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
24 जुल॰गुरुवारअमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Ashadhaचौथा चंद्र मास, जून से जुलाई तक, जब वर्षा आती है। रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा और चातुर्मास की शुरुआत सब इसी में पड़ते हैं।
28 जुल॰सोमवारविनायक चतुर्थीभद्रा 11:24 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
1 अग॰शुक्रवारमासिक दुर्गाष्टमीयह तिथि लगातार दो दिन निर्णायक क्षण को घेरती है, इसलिए कुछ पंचांग इस पर्व को अगले दिन रखते हैं। दोनों पाठ मान्य हैं।भद्रा 06:11 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
5 अग॰मंगलवारएकादशीभद्रा 01:12 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
6 अग॰बुधवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
9 अग॰शनिवारपूर्णिमाभद्रा 01:52 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
12 अग॰मंगलवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
19 अग॰मंगलवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
20 अग॰बुधवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
21 अग॰गुरुवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 12:17 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
23 अग॰शनिवारअमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Shravanaपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है।
27 अग॰बुधवारविनायक चतुर्थीभद्रा 03:44 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
31 अग॰रविवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 11:55 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
3 सित॰बुधवारएकादशीभद्रा 04:22 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
5 सित॰शुक्रवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
7 सित॰रविवारपूर्णिमाभद्रा 12:43 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
10 सित॰बुधवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
17 सित॰बुधवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
19 सित॰शुक्रवारमासिक शिवरात्रियह तिथि लगातार दो दिन निर्णायक क्षण को घेरती है, इसलिए कुछ पंचांग इस पर्व को अगले दिन रखते हैं। दोनों पाठ मान्य हैं।भद्रा 11:54 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
19 सित॰शुक्रवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
21 सित॰रविवारअमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Bhadrapadaछठा चंद्र मास, अगस्त से सितंबर तक। गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी इसी में पड़ते हैं, और इसकी पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है।
25 सित॰गुरुवारविनायक चतुर्थीभद्रा 09:33 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
30 सित॰मंगलवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 05:23 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
3 अक्टू॰शुक्रवारएकादशीभद्रा 06:33 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
4 अक्टू॰शनिवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
7 अक्टू॰मंगलवारपूर्णिमाभद्रा 10:53 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
10 अक्टू॰शुक्रवारसंकष्टी चतुर्थीयह तिथि दो निर्णायक क्षणों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए नियम अकेले दिन तय नहीं करता। यहाँ वह दिन दिया गया है जिसमें तिथि का अधिकांश भाग पड़ता है।Krishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
17 अक्टू॰शुक्रवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
18 अक्टू॰शनिवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
19 अक्टू॰रविवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 02:46 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
21 अक्टू॰मंगलवारअमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Ashwinaसातवाँ चंद्र मास, सितंबर से अक्टूबर तक। शारदीय नवरात्रि इसके शुक्ल पक्ष में चलती है और विजयादशमी पर पूरी होती है।
25 अक्टू॰शनिवारविनायक चतुर्थीभद्रा 03:48 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
30 अक्टू॰गुरुवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 09:50 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
2 नव॰रविवारएकादशीभद्रा 07:32 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
3 नव॰सोमवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
5 नव॰बुधवारपूर्णिमाभद्रा 08:44 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
8 नव॰शनिवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
15 नव॰शनिवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
17 नव॰सोमवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
18 नव॰मंगलवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 08:27 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
20 नव॰गुरुवारअमावस्याAmavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Kartikaआठवाँ चंद्र मास, अक्टूबर से नवंबर तक, और यही दिवाली का महीना है। करवा चौथ, धनतेरस, छठ और कार्तिक पूर्णिमा सब इसी में आते हैं।
24 नव॰सोमवारविनायक चतुर्थीभद्रा 09:22 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
28 नव॰शुक्रवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 12:28 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
1 दिस॰सोमवारएकादशीभद्रा 07:01 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
2 दिस॰मंगलवारप्रदोष व्रतShukla Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
4 दिस॰गुरुवारपूर्णिमायह तिथि दो निर्णायक क्षणों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए नियम अकेले दिन तय नहीं करता। यहाँ वह दिन दिया गया है जिसमें तिथि का अधिकांश भाग पड़ता है।भद्रा 06:41 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Purnimaपूरे चाँद की रात, शुक्ल पक्ष की पंद्रहवीं तिथि। गुरु पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और होली इसी पर पड़ती हैं, और यह दान का दिन है।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
7 दिस॰रविवारसंकष्टी चतुर्थीKrishna Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
15 दिस॰सोमवारएकादशीKrishna Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
17 दिस॰बुधवारप्रदोष व्रतKrishna Trayodashiतेरहवीं तिथि, शिव के प्रदोष व्रत की। कार्तिक की त्रयोदशी ही धनतेरस है, और उस दिन धातु ख़रीदने की परंपरा है।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
18 दिस॰गुरुवारमासिक शिवरात्रिभद्रा 03:47 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Krishna Chaturdashiचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
19 दिस॰शुक्रवारअमावस्यायह तिथि लगातार दो दिन निर्णायक क्षण को घेरती है, इसलिए कुछ पंचांग इस पर्व को अगले दिन रखते हैं। दोनों पाठ मान्य हैं।Amavasyaअमावस्या, कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, जब आकाश में चाँद होता ही नहीं। यह पितरों के तर्पण और श्राद्ध का दिन है, और दिवाली की रात भी अमावस्या है।Margashirshaनवाँ चंद्र मास, नवंबर से दिसंबर तक, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं। गीता जयंती इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है।
23 दिस॰मंगलवारविनायक चतुर्थीयह तिथि लगातार दो दिन निर्णायक क्षण को घेरती है, इसलिए कुछ पंचांग इस पर्व को अगले दिन रखते हैं। दोनों पाठ मान्य हैं।भद्रा 01:11 अपराह्न तकदिन के उजाले का चौथा पंचमांश, यानी दोपहर के बाद का समय। विजयादशमी और श्राद्ध कर्म इसी समय की तिथि से तय होते हैं।Shukla Chaturthiहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
28 दिस॰रविवारमासिक दुर्गाष्टमीभद्रा 12:39 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ashtamiआठवीं तिथि, जिस पर दुर्गा अष्टमी और जन्माष्टमी दोनों पड़ती हैं। पूजा के लिए यह प्रबल है, पर विवाह की तिथियों से इसे हटा दिया जाता है।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।
30 दिस॰मंगलवारएकादशीयह तिथि दो निर्णायक क्षणों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए नियम अकेले दिन तय नहीं करता। यहाँ वह दिन दिया गया है जिसमें तिथि का अधिकांश भाग पड़ता है।भद्रा 05:01 पूर्वाह्न तकसातवाँ चर करण, जिसे भद्रा कहते हैं। नया काम इसी करण के बीतने का इंतज़ार करता है, हालाँकि शुरू हो चुकी यात्रा चलती रहती है।Shukla Ekadashiहर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि, यानी चंद्र मास में दो बार। अधिकतर व्रत इसी दिन रखे जाते हैं, और इस दिन अन्न छोड़ दिया जाता है।Paushaदसवाँ चंद्र मास, दिसंबर से जनवरी तक। इसका अधिकांश समय सूर्य धनु में रहता है, इसलिए मकर संक्रांति तक विवाह रुक जाते हैं।

हिंदू कैलेंडर

वर्ष के अनुसार कैलेंडर

पूरा वर्ष एक ही सूची में: सभी नामी पर्व और सभी मासिक व्रत, हर एक की तिथि के साथ।

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ये तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं

हर पर्व एक चंद्रचंद्रमा, और भारतीय पद्धति का सबसे अहम ग्रह। मन, माता और मनःस्थिति इसके पास हैं, और आपकी राशि इसी से ली जाती है। मासचंद्र मास, जिसका नाम पूर्णिमा के नक्षत्र पर पड़ता है। यह लगभग साढ़े उनतीस दिन का होता है, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर से खिसकता रहता है।, एक पक्षचंद्र मास का उजला या अँधेरा पक्ष। शुक्ल पक्ष अमावस्या से पूर्णिमा तक चलता है और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा से अमावस्या तक। और एक तिथि है। मास वही हिस्सा है जिसमें ज़्यादातर कैलेंडर चूकते हैं, क्योंकि चंद्र मास का नाम सूर्यसूर्य। यह पिता, अधिकार और आपके उस हिस्से का ग्रह है जो दिखना चाहता है; सेहत और रीढ़ भी इसी के ज़िम्मे हैं। से पड़ता है: जो मास सूर्य के मीन में रहते शुरू हो वह चैत्रपहला चंद्र मास, मार्च और अप्रैल के बीच। इसकी शुक्ल प्रतिपदा नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा और उगादी कहते हैं, और उसके बाद राम नवमी आती है। है, जो मेष में रहते शुरू हो वह वैशाखदूसरा चंद्र मास, अप्रैल से मई तक। इसके शुक्ल पक्ष में अक्षय तृतीया पड़ती है, और बुद्ध पूर्णिमा पर यह पूरा होता है।, और इसी क्रम में आगे।

यही नियम अधिक मासलगभग हर तीसरे साल जोड़ा जाने वाला अतिरिक्त चंद्र मास, ताकि कैलेंडर ऋतुओं के साथ चलता रहे। इसमें कोई शुभ काम शुरू नहीं किया जाता। भी तय कर देता है। बारह चंद्रचंद्रमा, और भारतीय पद्धति का सबसे अहम ग्रह। मन, माता और मनःस्थिति इसके पास हैं, और आपकी राशि इसी से ली जाती है। मासचंद्र मास, जिसका नाम पूर्णिमा के नक्षत्र पर पड़ता है। यह लगभग साढ़े उनतीस दिन का होता है, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर से खिसकता रहता है। 354 दिन के होते हैं और वर्ष 365 का, इसलिए हर दो-तीन साल में कोई एक चंद्र मास ऐसा पड़ता है जिसमें कोई संक्रांतिवह दिन जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी में जाता है, यानी साल में बारह बार। जनवरी की मकर संक्रांति ही सबसे ज़्यादा मनाई जाती है। नहीं होती। वही अधिक मास है, उसका नाम अगले मास जैसा ही होता है, और उसमें कोई पर्व नहीं मनाया जाता। इसे चूकिए तो बाक़ी पूरे वर्ष के पर्व एक महीना पहले जा गिरते हैं।

फिर दूसरा सवाल आता है, जो ज़्यादा कठिन है: तिथि 21.5 से 26 घंटे तक की होती है, इसलिए वह कैलेंडर के दिन से नहीं मिलती। तिथि का उस समय मौजूद होना ज़रूरी है जिस समय कर्म वास्तव में किया जाता है। गणेश चतुर्थीहर पक्ष की चौथी तिथि, गणेश जी की तिथि, जिस पर संकष्टी और विनायक चतुर्थी होती है। यह रिक्ता तिथि भी है, इसलिए विवाह इस पर नहीं रखा जाता। मध्याह्नदिन के उजाले का तीसरा पंचमांश, यानी लगभग मध्य दिन। कुछ पर्व इसी समय की तिथि से तय होते हैं, जैसे गणेश चतुर्थी। में स्थापित होती है, विजयादशमी दिन के चौथे पंचमांश में, दिवाली सूर्यास्त के बाद प्रदोषसूर्यास्त के तुरंत बाद का समय, लगभग डेढ़ घंटा। दिवाली इसी समय की तिथि से तय होती है, और त्रयोदशी का व्रत इसी में किया जाता है। में, महाशिवरात्रि सौर मध्यरात्रि में, और करवा चौथ चंद्रोदय पर। केवल सामान्य नियम सूर्योदय का है।

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सवाल

दूसरी साइट अलग तारीख़ क्यों दिखाती है?
आम तौर पर तीन में से एक वजह होती है। हो सकता है वह ऐसे पर्व के लिए सूर्योदय की तिथि ले रही हो जिसका कर्म मध्याह्नदिन के उजाले का तीसरा पंचमांश, यानी लगभग मध्य दिन। कुछ पर्व इसी समय की तिथि से तय होते हैं, जैसे गणेश चतुर्थी। या मध्यरात्रि का है, जिससे शायद हर तीसरे साल तारीख़ एक दिन खिसक जाती है। हो सकता है वह पूर्णिमांतवह गणना जिसमें चंद्र मास पूर्णिमा पर पूरा होता है। उत्तर भारत इसी से चलता है, इसलिए कृष्ण पक्ष में उसका मास नाम एक आगे चलता है। महीने का नाम अमांतवह गणना जिसमें चंद्र मास अमावस्या पर पूरा होता है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत इसी से चलते हैं, और यहाँ की तिथियाँ इसी में निकाली जाती हैं। गणना में डाल रही हो, जिससे तारीख़ पूरे एक महीने खिसक जाती है। या फिर तिथि सचमुच लगातार दो दिन निर्णायक क्षण को घेरती हो, ऐसे में दोनों तारीख़ें मान्य हैं और यह पेज उसी पर्व के साथ यह बात लिख देता है।
यह पेज अमांत मानता है या पूर्णिमांत?
गणना अमांतवह गणना जिसमें चंद्र मास अमावस्या पर पूरा होता है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत इसी से चलते हैं, और यहाँ की तिथियाँ इसी में निकाली जाती हैं। में होती है और नाम दोनों दिखाए जाते हैं। कृष्ण पक्षअँधेरा पक्ष, पूर्णिमा से अमावस्या तक, जब चाँद हर रात घटता है। यह बुरा पक्ष नहीं है: जन्माष्टमी, धनतेरस और शिवरात्रि सब इसी में पड़ते हैं। में दोनों आधे महीने के अंतर पर चलते हैं, इसलिए महाशिवरात्रि पुणे में माघग्यारहवाँ चंद्र मास, जनवरी से फ़रवरी तक। प्रयाग में स्नान का महीना यही है, और वसंत पंचमी इसके शुक्ल पक्ष में पड़ती है। कृष्ण चतुर्दशीचौदहवीं तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या से ठीक पहले वाली। महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है, और विवाह के लिए यह रिक्ता तिथि है। है और दिल्ली में फाल्गुनबारहवाँ और अंतिम चंद्र मास, फ़रवरी से मार्च तक। इसकी पूर्णिमा पर होलिका जलती है, और अगले मास से वर्ष बदल जाता है। कृष्ण चतुर्दशी। रात एक ही, महीने के नाम दो। एक में गणना और दोनों का प्रदर्शन ही वह चीज़ है जो उत्तर भारतीय स्रोत से लिया गया नियम एक महीना ग़लत जाने से रोकती है।
अधिक मास क्या होता है?
वह अधिमास जो तब जोड़ा जाता है जब किसी चंद्रचंद्रमा, और भारतीय पद्धति का सबसे अहम ग्रह। मन, माता और मनःस्थिति इसके पास हैं, और आपकी राशि इसी से ली जाती है। मासचंद्र मास, जिसका नाम पूर्णिमा के नक्षत्र पर पड़ता है। यह लगभग साढ़े उनतीस दिन का होता है, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर से खिसकता रहता है। में कोई संक्रांतिवह दिन जब सूर्य एक राशि से निकलकर दूसरी में जाता है, यानी साल में बारह बार। जनवरी की मकर संक्रांति ही सबसे ज़्यादा मनाई जाती है। नहीं पड़ती। उसका नाम अगले मास जैसा ही होता है, इसलिए एक वर्ष में अधिक श्रावणपाँचवाँ चंद्र मास, जुलाई से अगस्त तक, और शिव के व्रतों का महीना। इसके सोमवार व्रत के होते हैं, और पूर्णिमा पर रक्षाबंधन आता है। और फिर निजनिज मास, यानी असली महीना। जब अधिक मास किसी महीने का नाम ले लेता है, तो उस जोड़ी का दूसरा महीना निज कहलाता है, और उस नाम के सारे पर्व उसी में होते हैं। श्रावण दोनों आ सकते हैं। उसमें कोई पर्व नहीं होता। 2020 में शारदीय नवरात्रि सितंबर की जगह 17 अक्टूबर को इसी कारण शुरू हुई थी।
क्या ये तिथियाँ मेरे शहर के लिए सही हैं?
भारत में कहीं भी, हाँ। भारतीय पंचांगदिन के पाँच अंग एक साथ: वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण। पंचांग किसी तारीख़ के बारे में जो कुछ कहता है, वह यहीं से शुरू होता है। एक ही राष्ट्रीय कैलेंडर छापते हैं जो संदर्भ मध्याह्नदिन के उजाले का तीसरा पंचमांश, यानी लगभग मध्य दिन। कुछ पर्व इसी समय की तिथि से तय होते हैं, जैसे गणेश चतुर्थी। रेखा पर बनता है, क्योंकि शहर बदलने पर बदल जाने वाली दिवाली किसी काम की नहीं। जिन सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय पर नियम परखा जाता है वे पूरे देश में एक घंटे से भी कम आगे-पीछे होते हैं, और इससे तिथि का दिन लगभग कभी नहीं बदलता।
पंडितजी से पूछें